आखिर किस बात की खुशी है इन्हें?

न्यायालय द्वारा सबूतों के अभाव में उज्जैन के प्रोफेसर सबरवाल के हत्यारों को छोड़ने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा देखिये किस प्रकार से प्रसन्नता व्यक्त की जा रही है। आखिर किस बात की खुशी है इन्हें? क्या अपने गुरु के मारे जाने की (अभी गुरु पूर्णिमा को गुजरे कुछ ही दिन हुये हैं) या उनके हत्यारों के छूट जाने की? क्या ये हमारी हिंदु संस्कृति है? हिदूवादियों के गिरावट का इससे कोई निकृष्ट उदाहरण हो सकता है क्या?

New-Low-In-Hindu-Politics

3 comments:

विवेक सिंह said...

हर बात में हिन्दुत्व को घसीटना कोई अच्छी बात नहीं लगी !आभार !

रंजन said...

शर्म करो.. काहे नाच रहे हो...

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

मानवता,शर्म और नैतिकता जैसे बन्धनों से मुक्ति का जश्न मनाया जा रहा है।

Post a Comment