बात यहीं तक रहेगी या आगे भी जायेगी
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद गे और उनके जैसे तमाम लोगों ने राहत की सांस ली होगी। अब उन्हें अपने हिसाब जिन्दगी जीने की कानूनी छूट रहेगी। हमें भी अब रोज - रोज की बिना मतलब की बहस और रोज-रोज समलैंगिकों के समर्थन में छपने वाले लेखों से छूट मिल जायेगी। बस अब देखना यही रहेगा कि ये बात यहीं तक रहेगी या फिर समलैंगिकों की शादी की आजादी, वेश्यावृति को भी व्यक्तिगत आजादी की मांग पर कानूनी मान्यता देने व अन्य बातों की ओर भी जायेगी। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से मेरी असहमति है लेकिम देश को और हमें इस आदेश को मानना चाहिये। उम्मीद है बात यहीं खत्म हो जायेगी।
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4 comments:
अरे बाबा यह तो शुरु आत है, अभी से बस ???
क्या कहें..दिमाग बंद हो गया है.
नहीं ये तो सिर्फ झांकी है।
यह तो एक ट्रेलर है ..........फिल्म बाकी है
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