आज के दिल्ली के अखबारों में एक ऐसी आपराधिक मामने की खबर छपी है जिससे ये पता चलता है कि अपराध करने में भारतीय लोगों का दिमाग कुछ ज्यादा ही तेज चलता है। अगर यही दिमाग किसी खुरापात के बजाय ढंग के काम मे लगाया जाता तो अपने साथ- साथ दूसरों का भी भला कर पाते। कुछ घटनायों जो मुझे याद हैं या हाल ही में हुई है
- एक तो आज ही की खबर है कि वह शातिर दिमाग के लोग अखबारों, टीवी चैनलों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों व रेलगाड़ियों के टायलेट में गुमशुदा लोगों के लगे विज्ञापनों में छपे फोन नंबरों पर कॉल करके गुमशुदा लोगों के परिजनों से फिरौती की रकम ऐंठते थे। उनसे ये लोग कहते थे कि तुम्हारे गायब लोग हमारे कब्जे में हैं और फिर उनसे फिरोती की रकम लेकर फरार हो जाते थे। कल इनको पुलिस ने पकड़ा है।
- एक हमारे मिलने वाले उत्तर प्रदेश के एक विश्वविद्यालय में काम करते हैं, उन्होंने बताया कि वहां पर कुछ कर्मचारी बिना कुछ करे ही पैसा कमा लेते हैं। वो विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं जैसे कि बी.एड., कानून आदि के परीक्षार्थियों से पास कराने के नाम पर पैसा ले लेते हैं और फिर कुछ न करके चुपचाप बैठ जातो हैं। परीक्षा का परिणाम आने पर जिनका चयन हो जाता है उनसे कहते हैं कि उन्होंने करवाया है और जिनका चयन नही होता है उनके पैसे वापस कर देते है। पैसै वापस देने से साख भी बनी रहती है और बिना कुछ करे कमाई भी हो जाती है।
- हमारे साथ पढा एक लड़का रेलवे में काम करता है, उसने बताया कि बड़े रेलवे स्टेशनों पर गाड़ी का प्लेटफार्म बदल कर भी कमाई की जाती है। मान लीजिये कि एक प्रमुख गाड़ी रोज प्लेटफार्म नम्बर एक पर आती है तो उसी प्लेटफार्म पर यात्री सामान या पानी इत्यादि खरीदने के लिये उतरते हैं, ऐसे में अन्य प्लेटफार्म को वेंडर भी कमाई करने के लिये स्टेशन व्यवस्थापकों को पैसे देकर किसी किसी दिन गाड़ी को अपने दूसरे प्लेटफार्म पर भी रुकवा लेते हैं। स्टेशन व्यवस्थापक तकनाकी गड़बड़ी की बहाना लेकर प्लेटफार्म बदल देते हैं।
- सोना और रुपया दुगना करके ठगी करने की कई घटनायें रोजाना समाचार पत्रों में छपती रहती हैं।
- हाल ही में अशोक जडेजा और दिल्ली में कई ठगों के पकड़े जाने कि घटनायें सामने आई हैं।
- छोटे से इलाज के बहाने किडनी निकालने की भी कई घटनायें सामने आती रहती है।
- सत्यम कंप्यूटर्स के घोटोले कि जानकारी तो आप सब को पता है कि कैसे बैलेंस शीट में हेरा-फेरी करके अरबों रुपये इधर उधर किये गये।
यहां मेरे कहने का मतलब ये है कि इतने शातिराना विचार कैसे लोगों के दिमाग में आते हैं। क्या हम अपराधों के बजाय इनको समाज के हित में काम करने के लिये इनका दिमाग नहीं मोड़ सकते। इसी प्रकार के कई शातिराना विचारो के बारे में अगर आप जानते हैं तो यहां बताये ताकि लोग सतर्क रह सकें।








6 comments:
सही सोच से इस सार्थक पोस्ट का जन्म हुआ है।
शातिरों के दिमाग भी शातिर होते है तभी तो इतने शातिर विचार आते हैं. बहुत सुन्दर आलेख
सत्यम कंप्यूटर्स के घोटोले कि जानकारी तो आप सब को पता है कि कैसे बैलेंस शीट में हेरा-फेरी करके अरबों रुपये इधर उधर किये गये।
-इसे भी भी़ड़ के साथ? उठाईगीरों और जेबकतरों के साथ लखना डकैत जैसे दिख रहा है.
जो पकडे जाते हें .. उन्हीं की चर्चा कर रहे हैं आप .. पर ऐसे बहुत शातिर लोग हैं .. जो इस ढंग से काम कर रहें हैं कि पकडे भी नहीं जाते .. और समाज को उसका बडा मूल्य चुकाना पड रहा है।
ऊपर दिये गये उदाहरण तो कुछ भी नहीं है जी, हमारे उज्जैन में एक LIC एजेंट ने भिखारियों और बेघरबार लोगों के फ़र्जी बीमे कर दिये, फ़िर उन्हें कार से कुचलकर बीमे की रकम भी साथियों के साथ मिलकर हड़प ली…। समूचे विश्व में है कोई ऐसा दिग्गज :)
सब कलियुग की माया है!!!!
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