परीक्षाओं के परिणामों में कई अच्छाईयां
आजकल विभिन्न परीक्षाओं के परिणामों के जारी होने के दिन हैं। विभिन्न राज्य बोर्डों और इंजीनियरिंग, मेडिकल तथा कुछ प्रसिद्ध प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों के बारे में कई दिनों से समाचार पत्रों में कुछ न कुछ छप रहा है। इसमें दो तरह की खबरें खास तौर पर छप रही हैं, एक तो इस तरह की कि कौन से कौन से छात्र-छत्राओं और उम्मीदवारों ने इन परीक्षाओं में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। वो क्या बनना चाहते हैं, किस तरह उन्होने तैयारी की, और वो आने वाले वर्षों के छात्र-छत्राओं और प्रतियोगियों के लिये क्या कहना चाहेंगे। लेकिन मेरे विचार में जो दूसरी तरह की खबरें इन परीक्षाओं के बारे में छप रही हैं, वो ज्याद महत्वपूर्ण हैं और ये वो समाचार हे जो ये बताते हैं कि किस तरह कुछ छात्र-छत्राओं और प्रतियोगियों ने विपरीत परिस्थितियों में परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है। कोई चाय वाले का बेटा है, कोई कामवाली बाई की बेटी है, कोई अत्यंत गरीब है, कोई 30 किलोमीटर रोज चलकर पढ़ने जाता था। किसी ने शानदार शैक्षिक परिस्थितियां न होने पर भी केवल लगन और मेहनत से परीक्षा पास की। इस तरह की खबरें मानवीय क्षमता का उच्चतम स्तर हैं। ये समाचार इन बातों को प्रदर्शित करते हैं कि किस तरह लोग अपने माहौल को दृढ़ निश्चय से बदलने को प्रयासरत हैं। ऐसे समाचारों को और प्रमुखता से प्रसारित करना चाहिये।
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